माइल्ड रेक्टोसील, सिस्टोसील और कब्ज का प्रबंधन: सर्जरी आमतौर पर पहला कदम क्यों नहीं है
August 6, 2026News
मिश्रित प्रकार के पेल्विक ऑर्गन प्रोलैप्स (Pelvic Organ Prolapse) जैसे माइल्ड रेक्टोसील (Rectocele), माइल्ड सिस्टोसील (Cystocele) या पेल्विक फ्लोर डिसफंक्शन (Pelvic Floor Dysfunction) और साथ में कब्ज की समस्या के बारे में सुनकर चिंता होना स्वाभाविक है। कई लोगों को लगता है कि सर्जरी (ऑपरेशन) ही इसका एकमात्र इलाज है, लेकिन सौभाग्य से अधिकांश मामलों में ऐसा नहीं होता है।
कई मरीजों में मुख्य समस्या शरीर में दिख रहे छोटे उभार (bulge) की नहीं होती, बल्कि मल त्याग (शौच) करते समय पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां किस तरह काम करती हैं, उसकी होती है। आमतौर पर मल आसानी से बाहर निकल सके, इसके लिए इन मांसपेशियों का शिथिल (relax) होना आवश्यक है। लेकिन कुछ लोगों में ये मांसपेशियां रिलैक्स होने के बजाय सिकुड़ (tighten) जाती हैं—जिसे डिसिनर्जिक डिफिकेशन (Dyssynergic Defecation) कहा जाता है। इसके कारण पेट साफ होने में कठिनाई होती है, मरीज को अत्यधिक जोर (straining) लगाना पड़ता है, पेट पूरी तरह साफ न होने का अहसास रहता है और पुरानी कब्ज बनी रहती है।
आपकी समस्या का सटीक कारण जानने के लिए आपके डॉक्टर आपकी मल त्याग की आदतों, मल के प्रकार, जोर लगाने की आवश्यकता पड़ती है या नहीं, उंगली की मदद लेनी पड़ती है या नहीं, साथ ही पेशाब से जुड़ी समस्याओं (जैसे पेशाब का लीक होना या रुकना) के बारे में पूछेंगे। इसके अलावा गर्भावस्था का इतिहास, पेल्विक हिस्से की पुरानी सर्जरी या मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) भी महत्वपूर्ण कारक हो सकते हैं। एनोरेक्टल मेनोमेट्री (Anorectal Manometry) और डिफेकोग्राफी (Defecography) जैसी जांचों से यह जाना जा सकता है कि आपकी कब्ज का मुख्य कारण मांसपेशियों का असंतुलन है या अंगों का खिसकना (प्रोलैप्स)।
इलाज का पहला कदम पेट साफ होने की प्रक्रिया में सुधार करना है। नरम मल आसानी से बाहर निकल जाता है और पेल्विक फ्लोर पर कम दबाव डालता है। पर्याप्त पानी पीना, ईसबगोल (psyllium) जैसा घुलनशील फाइबर (soluble fiber) आहार में लेना, शारीरिक रूप से सक्रिय रहना और आवश्यकता पड़ने पर पॉलीइथिलीन ग्लाइकोल (PEG) जैसे हल्के ऑस्मोटिक लैक्सेटिव (Laxatives) का उपयोग करने से मल त्याग सरल हो जाता है।
पेल्विक फ्लोर डिसिनर्जी के लिए सबसे प्रभावी इलाज बायोफीडबैक थेरेपी (Biofeedback Therapy) है। विशेषज्ञ थेरेपिस्ट के मार्गदर्शन में होने वाले सत्रों के दौरान, आपको मल त्याग के समय पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को शिथिल (relax) करने और पेट के दबाव का सही तरीके से उपयोग करने का प्रशिक्षण दिया जाता है। यह थेरेपी मांसपेशियों को फिर से सामान्य रूप से काम करना सिखाती है। अध्ययन दर्शाते हैं कि सही तरीके से की गई बायोफीडबैक थेरेपी से 70% से 80% मरीजों में महत्वपूर्ण सुधार देखने को मिलता है, इसलिए इस स्थिति के लिए इसे सबसे बेहतरीन और प्राथमिक उपचार माना जाता है।
शौचालय की आदतों में छोटे-छोटे बदलाव करने से भी बहुत फायदा होता है:
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शौच के समय पैरों के नीचे छोटी घोड़ी/स्टूल (Foot stool) रखकर बैठें और थोड़ा आगे की ओर झुकें।
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कमोड/टॉयलेट पर अनावश्यक रूप से लंबे समय तक न बैठे रहें।
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प्राकृतिक रूप से शौच की इच्छा महसूस होते ही तुरंत जाएं।
जब रेक्टोसील और सिस्टोसील दोनों एक साथ हों, तो पेल्विक फ्लोर फिजियोथेरेपी की सलाह भी दी जाती है। यह उपचार मांसपेशियों के तालमेल, सांस लेने की तकनीकों और रिलैक्सेशन अभ्यासों पर ध्यान केंद्रित करता है। यह याद रखना बहुत महत्वपूर्ण है कि “कीगल (Kegel) एक्सरसाइज हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं होती हैं”। जिन मरीजों की पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां पहले से ही अत्यधिक कड़क (hypertonic) हों, यदि वे बिना सही मार्गदर्शन के यह एक्सरसाइज करते हैं, तो कब्ज बढ़ सकती है।
माइल्ड रेक्टोसील के लिए सर्जरी (ऑपरेशन) कभी भी पहला विकल्प नहीं होता है। सर्जरी पर विचार केवल तभी किया जाता है जब प्रोलैप्स के कारण गंभीर लक्षण हों, अन्य सभी गैर-सर्जिकल उपचार विफल हो चुके हों या मरीज के दैनिक जीवन की गुणवत्ता पर बहुत गहरा असर पड़ रहा हो। ऑपरेशन से पहले पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों की समस्या का इलाज करने से लंबे समय में बेहतर परिणाम मिलते हैं।
मुख्य संदेश (Take-home Message)
यदि आपको माइल्ड रेक्टोसील, माइल्ड सिस्टोसील और कब्ज का निदान (diagnosis) हुआ है, तो घबराएं नहीं। अधिकांश मामलों में, बायोफीडबैक थेरेपी, शौच की आदतों में बदलाव, पेल्विक फ्लोर फिजियोथेरेपी और जीवनशैली में सुधार के माध्यम से लक्षणों को सफलतापूर्वक नियंत्रित किया जा सकता है। केवल शारीरिक उभार (bulge) के बजाय मांसपेशियों की मुख्य समस्या का इलाज करने से अधिकांश मरीज बिना ऑपरेशन के लंबे समय तक राहत पा सकते हैं।
अधिक जानकारी के लिए हमारे विशेषज्ञ गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. वत्सल मेहता से मिलें।